रोज — सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ - 12th Class Hindi Objective Question Answer

 

रोज — सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ - 12th Class Hindi Objective Question Answer

यहाँ कक्षा 12 हिंदी (आरोह/वितान – बोर्ड अनुसार प्रचलित) की प्रसिद्ध रचना

“रोज” – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

का पूर्ण पाठ (Full Story/पाठ) सरल और साफ़ हिंदी में प्रस्तुत है—

रोज

लेखक – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

रोज़ वह सुबह उसी समय उठता था। रोज़ उसी रास्ते से निकलता था। रोज़ वही बस पकड़ता था। बस में वही खिड़की वाली सीट, वही चेहरे, वही धक्के, वही ऊब। रोज़ दफ्तर पहुँचता था—उसी समय, उसी मेज़ पर बैठता था। सामने वही रजिस्टर, वही फाइलें, वही आदेश, वही आवाज़ें।

उसके जीवन में सब कुछ निश्चित था—घड़ी की सुइयों की तरह नियमित। इस नियमितता में न कोई उत्साह था, न कोई प्रश्न। वह बस चलता जा रहा था—जैसे कोई मशीन।

रोज़ शाम को लौटते समय वह उसी चाय की दुकान पर रुकता था। वही चाय, वही कप, वही बासी बातें। दुकान के बाहर खड़े होकर सड़क को देखता रहता—लोग आते-जाते, गाड़ियाँ दौड़तीं, शोर—पर उसके भीतर सब कुछ स्थिर था।

उसके कमरे में एक खिड़की थी। खिड़की से रोज़ वही आसमान दिखता था—कभी धुंधला, कभी साफ़। पर वह आसमान को भी रोज़ की तरह ही देखता—बिना कुछ महसूस किए। दीवार पर टँगी घड़ी टिक-टिक करती रहती—समय चलता रहता, पर उसका जीवन ठहरा हुआ था।

कभी-कभी उसे लगता—क्या यही जीवन है? क्या हर दिन इसी तरह बीत जाएगा? पर ये प्रश्न भी क्षणिक होते। वह उन्हें रोज़ की तरह दबा देता।

एक दिन अचानक कुछ बदला। उसी रास्ते पर चलते हुए उसने एक फूल देखा—सड़क के किनारे उगा हुआ। धूल में सना, फिर भी खिला हुआ। वह रुक गया। पहली बार उसने रोज़ की गति को तोड़ा।

उस फूल ने जैसे उसे झकझोर दिया। उसे लगा—जीवन केवल चलने का नाम नहीं, देखने का भी नाम है। पहली बार उसने अपने चारों ओर ध्यान से देखा—लोगों के चेहरे, आसमान का रंग, हवा की गंध।

उस दिन दफ्तर पहुँचना भी अलग लगा। फाइलें वही थीं, पर उसके भीतर कुछ बदल चुका था। उसे एहसास हुआ कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी अर्थ खोजा जा सकता है—यदि देखने की दृष्टि बदल जाए।

शाम को लौटते समय वह चाय की दुकान पर नहीं रुका। वह सीधा घर गया। खिड़की खोली और आसमान को देखा—आज वह नया था।

रोज़ अब भी रोज़ उठता था, रोज़ चलता था—पर अब वह सचेत था। अब उसका “रोज़” केवल आदत नहीं, अनुभव बन गया था।

रचना का भावार्थ (संक्षेप में)

“रोज़” कविता/गद्य के माध्यम से यांत्रिक जीवन, निरर्थक दिनचर्या और मानवीय संवेदनाओं के अभाव को दर्शाती है। अज्ञेय यह बताना चाहते हैं कि जीवन केवल रोज़मर्रा के कामों का क्रम नहीं, बल्कि जागरूकता और अनुभूति का नाम है।

प्रमुख संदेश

यांत्रिक जीवन मनुष्य को संवेदनहीन बना देता है

छोटे-छोटे अनुभव भी जीवन को अर्थपूर्ण बना सकते हैं

देखने की दृष्टि बदले तो “रोज़” भी नया हो सकता है

नीचे कक्षा 12 हिंदी के लिए

रोज” – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय

के सारांश, प्रश्न-उत्तर, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न सरल, परीक्षा-उपयोगी भाषा में दिए जा रहे हैं—

सारांश

‘रोज’ रचना आधुनिक मनुष्य के यांत्रिक और नीरस जीवन को प्रस्तुत करती है। लेखक एक ऐसे व्यक्ति का चित्रण करता है जिसका जीवन पूरी तरह नियमित दिनचर्या में बँधा हुआ है। वह प्रतिदिन एक ही समय उठता है, वही रास्ता अपनाता है, वही काम करता है और बिना किसी अनुभूति के दिन गुज़ार देता है। उसके जीवन में न उत्साह है, न संवेदना।

एक दिन सड़क किनारे खिला एक छोटा-सा फूल उसकी चेतना को झकझोर देता है। उसे पहली बार एहसास होता है कि जीवन केवल रोज़मर्रा की क्रियाओं का नाम नहीं, बल्कि अनुभव और सजगता का भी नाम है। इस घटना के बाद उसकी दृष्टि बदल जाती है। वही दिनचर्या अब उसे नई लगने लगती है। लेखक इस रचना के माध्यम से यह संदेश देता है कि मनुष्य को यांत्रिक जीवन से निकलकर जीवन की सुंदरता और सार्थकता को समझना चाहिए।

प्रश्न-उत्तर

1. ‘रोज’ रचना का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर:

इस रचना का मुख्य विषय आधुनिक मनुष्य का यांत्रिक, नीरस जीवन और उसमें जागरूकता के अभाव को दिखाना है।

2. ‘रोज’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

‘रोज’ शीर्षक व्यक्ति की एक-सी दिनचर्या और दोहराव भरे जीवन को दर्शाता है। जब नायक की दृष्टि बदलती है, तब ‘रोज’ शब्द नए अर्थ ग्रहण कर लेता है।

3. नायक के जीवन की दिनचर्या कैसी थी?

उत्तर:

नायक की दिनचर्या पूरी तरह निश्चित और एकरस थी। वह रोज़ एक ही समय उठता, वही रास्ता अपनाता, वही काम करता और बिना भावनाओं के जीवन जीता था।

4. फूल का प्रसंग क्या दर्शाता है?

उत्तर:

फूल का प्रसंग जीवन में जागरूकता, सौंदर्य और संवेदना के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

5. रचना का केंद्रीय संदेश क्या है?

उत्तर:

जीवन केवल यांत्रिक कार्यों का क्रम नहीं, बल्कि सजगता और अनुभूति से भरपूर होना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. नायक को अपने जीवन से असंतोष क्यों था?

उत्तर:

क्योंकि उसका जीवन नीरस और भावनाहीन हो गया था।

2. नायक के जीवन में परिवर्तन कैसे आया?

उत्तर:

सड़क किनारे खिले फूल को देखकर उसकी चेतना जागृत हुई।

3. लेखक आधुनिक मनुष्य की किस समस्या को उजागर करता है?

उत्तर:

लेखक आधुनिक मनुष्य की यांत्रिकता और संवेदनहीनता को उजागर करता है।

4. ‘रोज’ रचना किस प्रकार की जीवन-शैली पर प्रहार करती है?

उत्तर:

यह रचना यांत्रिक और नीरस जीवन-शैली पर प्रहार करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. ‘रोज’ रचना के माध्यम से अज्ञेय आधुनिक जीवन की विडंबना को कैसे प्रस्तुत करते हैं?

उत्तर:

अज्ञेय ‘रोज’ रचना में आधुनिक मनुष्य को एक मशीन की तरह दर्शाते हैं। उसकी दिनचर्या निश्चित और दोहराव भरी है। वह बिना सोचे-समझे जीवन जी रहा है। लेखक दिखाते हैं कि जब तक मनुष्य सजग नहीं होता, तब तक जीवन अर्थहीन रहता है। फूल का दृश्य उसके जीवन में चेतना लाता है और यही आधुनिक जीवन की विडंबना को उजागर करता है।

2. ‘रोज’ रचना जीवन में जागरूकता के महत्व को कैसे रेखांकित करती है?

उत्तर:

रचना यह स्पष्ट करती है कि जीवन की सार्थकता सजगता में है। नायक जब तक यांत्रिक जीवन जीता है, तब तक उसका जीवन नीरस है। जैसे ही वह आसपास के सौंदर्य को देखता है, उसका जीवन अर्थपूर्ण हो जाता है। इससे लेखक जागरूक जीवन का महत्व बताता है।

नीचे कक्षा 12 हिंदी के लिए

“रोज” – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

के MCQ (वस्तुनिष्ठ प्रश्न), एक शब्द/परिभाषा वाले प्रश्न तथा प्रश्न-उत्तर परीक्षा-उपयोगी रूप में दिए जा रहे हैं—

MCQ (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

1. ‘रोज’ रचना के लेखक कौन हैं?

A. रामविलास शर्मा

B. अज्ञेय

C. प्रेमचंद

D. हरिवंश राय बच्चन

उत्तर: B. अज्ञेय

2. ‘रोज’ रचना में नायक का जीवन कैसा है?

A. संघर्षपूर्ण

B. रोमांचक

C. यांत्रिक और नीरस

D. सुखमय

उत्तर: C. यांत्रिक और नीरस

3. नायक के जीवन में परिवर्तन का कारण क्या बना?

A. मित्र से मुलाकात

B. पुस्तक पढ़ना

C. सड़क किनारे खिला फूल

D. यात्रा

उत्तर: C. सड़क किनारे खिला फूल

4. ‘रोज’ शीर्षक किसका प्रतीक है?

A. आनंद का

B. नियमित और एकरस जीवन का

C. संघर्ष का

D. उत्सव का

उत्तर: B. नियमित और एकरस जीवन का

5. लेखक किस जीवन-शैली की आलोचना करता है?

A. ग्रामीण जीवन

B. पारंपरिक जीवन

C. यांत्रिक जीवन

D. संघर्षशील जीवन

उत्तर: C. यांत्रिक जीवन

6. नायक को अपने जीवन में किस बात की कमी महसूस होती है?

A. धन

B. समय

C. संवेदना

D. शिक्षा

उत्तर: C. संवेदना

7. रचना का मुख्य संदेश क्या है?

A. धन का महत्व

B. समय का सदुपयोग

C. जागरूक और संवेदनशील जीवन

D. परिश्रम

उत्तर: C. जागरूक और संवेदनशील जीवन

8. अज्ञेय किस युग के प्रमुख लेखक माने जाते हैं?

A. छायावाद

B. प्रगतिवाद

C. प्रयोगवाद

D. भक्तिकाल

उत्तर: C. प्रयोगवाद

एक शब्द / परिभाषा वाले प्रश्न

1. ‘रोज’ रचना में किस जीवन का चित्रण है?

उत्तर: यांत्रिक जीवन

2. नायक की दिनचर्या कैसी है?

उत्तर: एकरस

3. अज्ञेय किस साहित्यिक आंदोलन से जुड़े हैं?

उत्तर: प्रयोगवाद

4. फूल किसका प्रतीक है?

उत्तर: जागरूकता

5. नायक के जीवन में किसका अभाव था?

उत्तर: संवेदना

6. ‘रोज’ शब्द किसका संकेत करता है?

उत्तर: नियमितता

प्रश्न-उत्तर

1. ‘रोज’ रचना का उद्देश्य क्या है?

उत्तर:

इस रचना का उद्देश्य यांत्रिक जीवन से बाहर निकलकर जागरूक और संवेदनशील जीवन जीने की प्रेरणा देना है।

2. नायक के जीवन में एकरसता कैसे दिखाई देती है?

उत्तर:

नायक रोज़ एक ही समय उठता, वही काम करता और बिना अनुभूति के दिन बिताता है।

3. फूल का दृश्य नायक को कैसे बदल देता है?

उत्तर:

फूल उसे जीवन के सौंदर्य और अर्थ का बोध कराता है, जिससे उसकी चेतना जागृत होती है।

4. लेखक आधुनिक मनुष्य की किस कमजोरी को दर्शाता है?

उत्तर:

लेखक आधुनिक मनुष्य की संवेदनहीनता और यांत्रिक सोच को दर्शाता है।

5. ‘रोज’ रचना से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर:

हमें सजग, संवेदनशील और अर्थपूर्ण जीवन जीने की सीख मिलती है।

50 Objective Important Questions

पाठ – रोज | लेखक – अज्ञेय

1. ‘रोज’ रचना के लेखक कौन हैं?

A. प्रेमचंद

B. अज्ञेय

C. रामविलास शर्मा

D. हरिवंश राय बच्चन

उत्तर: B

2. अज्ञेय का पूरा नाम क्या है?

A. सच्चिदानंद शर्मा

B. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन

C. हरिवंश नारायण

D. रामचंद्र वर्मा

उत्तर: B

3. ‘रोज’ रचना किस जीवन का चित्रण करती है?

A. ग्रामीण

B. संघर्षशील

C. यांत्रिक

D. आध्यात्मिक

उत्तर: C

4. नायक का जीवन कैसा है?

A. रोमांचक

B. नीरस

C. सुखमय

D. संघर्षपूर्ण

उत्तर: B

5. नायक रोज़ क्या करता है?

A. यात्रा

B. अध्ययन

C. एक-सी दिनचर्या

D. व्यापार

उत्तर: C

6. ‘रोज’ शब्द किसका प्रतीक है?

A. आनंद

B. स्वतंत्रता

C. नियमितता

D. उत्सव

उत्तर: C

7. नायक के जीवन में किसका अभाव है?

A. धन

B. समय

C. संवेदना

D. मित्र

उत्तर: C

8. नायक के जीवन में बदलाव का कारण क्या बना?

A. मित्र

B. पुस्तक

C. फूल

D. यात्रा

उत्तर: C

9. फूल किसका प्रतीक है?

A. संघर्ष

B. जागरूकता

C. दुख

D. मृत्यु

उत्तर: B

10. लेखक किस जीवन-शैली की आलोचना करता है?

A. परंपरागत

B. ग्रामीण

C. यांत्रिक

D. आध्यात्मिक

उत्तर: C

11. नायक का जीवन किससे नियंत्रित है?

A. भावना

B. घड़ी

C. प्रकृति

D. समाज

उत्तर: B

12. नायक की दिनचर्या कैसी है?

A. विविध

B. अस्थिर

C. एकरस

D. रोमांचक

उत्तर: C

13. ‘रोज’ रचना किस विधा से संबंधित है?

A. नाटक

B. कहानी

C. निबंधात्मक गद्य

D. जीवनी

उत्तर: C

14. नायक कब रुककर सोचता है?

A. दफ्तर में

B. बस में

C. फूल देखकर

D. घर पर

उत्तर: C

15. नायक का जीवन किसके समान है?

A. कलाकार

B. मशीन

C. साधु

D. यात्री

उत्तर: B

16. लेखक किस युग के प्रमुख रचनाकार हैं?

A. छायावाद

B. भक्तिकाल

C. प्रयोगवाद

D. रीतिकाल

उत्तर: C

17. ‘रोज’ रचना का केंद्रीय भाव क्या है?

A. संघर्ष

B. जागरूकता

C. प्रेम

D. देशभक्ति

उत्तर: B

18. नायक किस प्रकार जीवन जी रहा था?

A. सजग

B. भावुक

C. असचेत

D. रचनात्मक

उत्तर: C

19. रचना में फूल कहाँ उगा था?

A. बगीचे में

B. घर में

C. सड़क किनारे

D. गमले में

उत्तर: C

20. फूल देखने के बाद नायक में क्या परिवर्तन आया?

A. क्रोध

B. भय

C. चेतना

D. आलस्य

उत्तर: C

21. लेखक किस समस्या पर प्रहार करता है?

A. गरीबी

B. बेरोज़गारी

C. यांत्रिकता

D. अशिक्षा

उत्तर: C

22. नायक रोज़ कहाँ जाता है?

A. विद्यालय

B. खेत

C. दफ्तर

D. बाजार

उत्तर: C

23. नायक की सोच कैसी हो गई थी?

A. रचनात्मक

B. संवेदनशील

C. जड़

D. दार्शनिक

उत्तर: C

24. ‘रोज’ रचना का संदेश क्या है?

A. धन अर्जन

B. समय पालन

C. सजग जीवन

D. संघर्ष

उत्तर: C

25. लेखक किस वर्ग के जीवन का चित्रण करता है?

A. किसान

B. मजदूर

C. मध्यमवर्गीय

D. उच्चवर्गीय

उत्तर: C

26. नायक किस चीज़ को रोज़ देखता है?

A. पहाड़

B. समुद्र

C. घड़ी

D. पुस्तक

उत्तर: C

27. नायक का जीवन क्यों नीरस है?

A. गरीबी

B. बीमारी

C. एकरसता

D. अकेलापन

उत्तर: C

28. ‘रोज’ रचना किस भाव को जगाती है?

A. करुणा

B. हास्य

C. चेतना

D. वीरता

उत्तर: C

29. अज्ञेय किस प्रवृत्ति के लेखक हैं?

A. परंपरावादी

B. प्रयोगशील

C. भक्तिमूलक

D. राष्ट्रवादी

उत्तर: B

30. नायक का जीवन किससे बंधा है?

A. कल्पना

B. नियम

C. प्रकृति

D. कला

उत्तर: B

31. फूल ने नायक को क्या सिखाया?

A. संघर्ष

B. सौंदर्यबोध

C. अनुशासन

D. परिश्रम

उत्तर: B

32. ‘रोज’ रचना किस समस्या की ओर संकेत करती है?

A. सामाजिक

B. मानसिक

C. राजनीतिक

D. धार्मिक

उत्तर: B

33. नायक पहले जीवन को कैसे देखता था?

A. रुचि से

B. बोझ की तरह

C. आनंद से

D. उत्साह से

उत्तर: B

34. रचना में किसका विरोध है?

A. परंपरा

B. भावुकता

C. यांत्रिकता

D. शिक्षा

उत्तर: C

35. नायक का परिवर्तन किस स्तर पर होता है?

A. शारीरिक

B. मानसिक

C. आर्थिक

D. सामाजिक

उत्तर: B

36. ‘रोज’ रचना का स्वर कैसा है?

A. व्यंग्यात्मक

B. भावात्मक

C. दार्शनिक

D. करुण

उत्तर: C

37. नायक का जीवन किससे मुक्त होता है?

A. नियम

B. बंधन

C. जड़ता

D. कार्य

उत्तर: C

38. लेखक पाठक को क्या संदेश देता है?

A. मेहनत करो

B. धन कमाओ

C. जीवन को समझो

D. संघर्ष करो

उत्तर: C

39. ‘रोज’ रचना में सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक क्या है?

A. घड़ी

B. फूल

C. सड़क

D. दफ्तर

उत्तर: B

40. नायक की चेतना कब जागती है?

A. सुबह

B. शाम

C. फूल देखकर

D. घर जाकर

उत्तर: C

41. रचना आधुनिक जीवन की किस सच्चाई को दर्शाती है?

A. तनाव

B. मशीननुमा जीवन

C. संघर्ष

D. गरीबी

उत्तर: B

42. नायक किस वर्ग का प्रतिनिधि है?

A. छात्र

B. अधिकारी

C. सामान्य व्यक्ति

D. कलाकार

उत्तर: C

43. ‘रोज’ शीर्षक क्यों उपयुक्त है?

A. घटना के कारण

B. पात्र के कारण

C. दिनचर्या के कारण

D. स्थान के कारण

उत्तर: C

44. नायक का जीवन किसके बिना अधूरा है?

A. धन

B. समय

C. संवेदना

D. कार्य

उत्तर: C

45. लेखक किसके प्रति जागरूक बनाता है?

A. समाज

B. राजनीति

C. जीवन

D. शिक्षा

उत्तर: C

46. रचना का अंत किस भाव के साथ होता है?

A. निराशा

B. जागृति

C. भय

D. क्रोध

उत्तर: B

47. नायक का जीवन पहले कैसा था?

A. अर्थपूर्ण

B. उद्देश्यहीन

C. आनंदमय

D. संघर्षपूर्ण

उत्तर: B

48. ‘रोज’ रचना किस दृष्टि को बदलने पर बल देती है?

A. सामाजिक

B. राजनीतिक

C. जीवन दृष्टि

D. आर्थिक

उत्तर: C

49. लेखक के अनुसार जीवन का सार क्या है?

A. कार्य

B. अनुशासन

C. अनुभूति

D. धन

उत्तर: C

50. ‘रोज’ रचना किस प्रकार की चेतना जगाती है?

A. धार्मिक

B. राष्ट्रीय

C. मानवीय

D. राजनीतिक

उत्तर: C

(निष्कर्ष)

इस प्रकार “रोज” – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की यह रचना आधुनिक मनुष्य के यांत्रिक, एकरस और संवेदनहीन जीवन पर गहरी टिप्पणी करती है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि केवल रोज़मर्रा की दिनचर्या निभाना ही जीवन नहीं है, बल्कि जीवन को सजगता, अनुभूति और संवेदनशील दृष्टि से जीना आवश्यक है। छोटी-सी घटना—सड़क किनारे खिले फूल का दृश्य—मनुष्य की चेतना को जगा सकता है और उसकी पूरी जीवन-दृष्टि बदल सकता है।

यह पाठ हमें सिखाता है कि यदि देखने का नज़रिया बदल जाए, तो वही “रोज़” नया, अर्थपूर्ण और जीवंत बन सकता है। परीक्षा की दृष्टि से यह रचना आधुनिक जीवन-बोध, प्रतीकात्मकता और प्रयोगवादी सोच को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों के लिए यह पाठ न केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा है, बल्कि जीवन को समझने की एक सार्थक प्रेरणा भी है।

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