विद्या ददाति विनयम्
(कक्षा 10 संस्कृत – संपूर्ण पाठ / Full Story)
पाठ का अर्थ एवं भावार्थ (Story / Explanation):
“विद्या ददाति विनयम्” एक प्रसिद्ध संस्कृत सूक्ति है, जो शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट करती है। इस पाठ में बताया गया है कि सच्ची विद्या केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, व्यवहार और जीवन-मूल्यों को भी श्रेष्ठ बनाती है।
इस सूक्ति का अर्थ है—
विद्या से विनय (नम्रता) उत्पन्न होती है,
विनय से पात्रता आती है,
पात्रता से धन की प्राप्ति होती है,
धन से धर्म का आचरण होता है,
और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार विद्या मानव जीवन को पूर्णता की ओर ले जाती है।
पूर्ण श्लोक (मूल पाठ):
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
सरल हिन्दी भावार्थ:
विद्या मनुष्य को विनम्र बनाती है।
विनम्रता से मनुष्य योग्य बनता है।
योग्यता से धन की प्राप्ति होती है।
धन से धर्म के कार्य किए जाते हैं।
और धर्म से जीवन में सच्चा सुख मिलता है।
कहानी का सार (Summary):
इस पाठ में यह संदेश दिया गया है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी या धन कमाना नहीं है, बल्कि व्यक्ति को सभ्य, विनम्र और चरित्रवान बनाना है। जो व्यक्ति वास्तव में शिक्षित होता है, वह अहंकार नहीं करता, बल्कि दूसरों का सम्मान करता है। विनम्र व्यक्ति ही समाज में आदर पाता है और वही जीवन में सच्चा सुख प्राप्त करता है।
मुख्य शिक्षाएँ (Moral Values):
विद्या अहंकार नहीं, विनम्रता सिखाती है
विनय से ही सच्ची महानता आती है
धन का सही उपयोग धर्म और सेवा में होना चाहिए
धर्ममय जीवन से ही स्थायी सुख मिलता है
विद्या ददाति विनयम्
कक्षा 10 संस्कृत – प्रश्न-उत्तर, लघु/दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं सारांश
पाठ का सारांश (Summary)
“विद्या ददाति विनयम्” पाठ में शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट किया गया है। इस पाठ के अनुसार विद्या मनुष्य को विनम्र बनाती है। विनम्रता से पात्रता आती है और पात्रता से धन की प्राप्ति होती है। धन का सदुपयोग धर्म के कार्यों में किया जाता है, जिससे मनुष्य को सच्चा और स्थायी सुख मिलता है। इस प्रकार विद्या मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाकर उसे नैतिक एवं सुखमय बनाती है।
प्रश्न-उत्तर (Question–Answer)
प्रश्न 1.
“विद्या ददाति विनयम्” पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर:
इसका अर्थ है कि विद्या मनुष्य में विनम्रता उत्पन्न करती है।
प्रश्न 2.
विनय से क्या प्राप्त होता है?
उत्तर:
विनय से पात्रता प्राप्त होती है।
प्रश्न 3.
पात्रता से मनुष्य क्या प्राप्त करता है?
उत्तर:
पात्रता से मनुष्य धन प्राप्त करता है।
प्रश्न 4.
धन का सदुपयोग किस कार्य में होता है?
उत्तर:
धन का सदुपयोग धर्म के कार्यों में होता है।
प्रश्न 5.
धर्म से क्या प्राप्त होता है?
उत्तर:
धर्म से सच्चा और स्थायी सुख प्राप्त होता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1.
विद्या का मनुष्य के जीवन में क्या महत्व है?
उत्तर:
विद्या मनुष्य को विनम्र, योग्य और संस्कारी बनाती है तथा जीवन को सफल बनाती है।
प्रश्न 2.
विनय को क्यों आवश्यक बताया गया है?
उत्तर:
विनय से व्यक्ति योग्य बनता है और समाज में सम्मान प्राप्त करता है।
प्रश्न 3.
इस पाठ से हमें कौन-सी शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची विद्या अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता और धर्म की ओर ले जाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1.
“विद्या ददाति विनयम्” पाठ के आधार पर विद्या के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
“विद्या ददाति विनयम्” पाठ में विद्या को मानव जीवन का आधार बताया गया है। विद्या मनुष्य को विनम्र बनाती है और अहंकार को दूर करती है। विनम्र व्यक्ति ही योग्य बनता है और समाज में आदर पाता है। योग्यता से धन की प्राप्ति होती है, जिसका उपयोग धर्म के कार्यों में किया जाता है। धर्म के आचरण से जीवन में सच्चा सुख प्राप्त होता है। इस प्रकार विद्या मनुष्य को नैतिक, धार्मिक और सुखी जीवन की ओर ले जाती है।
प्रश्न 2.
पाठ में बताए गए जीवन-क्रम को समझाइए।
उत्तर:
पाठ में जीवन का एक सुंदर क्रम बताया गया है—
विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख।
यह क्रम बताता है कि विद्या से ही जीवन की सही शुरुआत होती है और अंत में मनुष्य को वास्तविक सुख की प्राप्ति होती है।
विद्या ददाति विनयम्
कक्षा 10 संस्कृत – MCQ, एक शब्द/परिभाषा वाले प्रश्न एवं प्रश्न-उत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1. “विद्या ददाति विनयम्” का मुख्य भाव क्या है?
A. धन की महिमा
B. विद्या से विनय
C. सुख की प्राप्ति
D. धर्म का महत्व
उत्तर: B. विद्या से विनय
प्रश्न 2. विनय से क्या प्राप्त होता है?
A. सुख
B. धर्म
C. पात्रता
D. धन
उत्तर: C. पात्रता
प्रश्न 3. पात्रता से क्या प्राप्त होता है?
A. विद्या
B. विनय
C. धन
D. सुख
उत्तर: C. धन
प्रश्न 4. धन से किसकी प्राप्ति होती है?
A. विद्या
B. विनय
C. धर्म
D. पात्रता
उत्तर: C. धर्म
प्रश्न 5. धर्म से क्या प्राप्त होता है?
A. धन
B. विनय
C. पात्रता
D. सुख
उत्तर: D. सुख
प्रश्न 6. यह पाठ किस विषय पर आधारित है?
A. राजनीति
B. व्यापार
C. शिक्षा
D. युद्ध
उत्तर: C. शिक्षा
प्रश्न 7. विद्या का वास्तविक उद्देश्य क्या बताया गया है?
A. केवल धन कमाना
B. अहंकार बढ़ाना
C. विनम्रता और सद्गुण
D. प्रसिद्धि पाना
उत्तर: C. विनम्रता और सद्गुण
प्रश्न 8. “विनय” शब्द का अर्थ क्या है?
A. क्रोध
B. अहंकार
C. नम्रता
D. भय
उत्तर: C. नम्रता
एक शब्द / परिभाषा वाले प्रश्न
प्रश्न 1. विद्या से क्या उत्पन्न होता है?
उत्तर: विनय
प्रश्न 2. विनय से प्राप्त होने वाला गुण क्या है?
उत्तर: पात्रता
प्रश्न 3. धर्म का फल क्या है?
उत्तर: सुख
प्रश्न 4. धन का सदुपयोग किसमें होता है?
उत्तर: धर्म
प्रश्न 5. विनय का एक शब्द में अर्थ लिखिए।
उत्तर: नम्रता
अति लघु प्रश्न-उत्तर (Very Short Q&A)
प्रश्न 1. विद्या मनुष्य को कैसा बनाती है?
उत्तर: विनम्र
प्रश्न 2. समाज में सम्मान किसे मिलता है?
उत्तर: विनयी व्यक्ति को
प्रश्न 3. सच्चा सुख किससे मिलता है?
उत्तर: धर्म से
प्रश्न 4. विद्या का अंतिम फल क्या है?
उत्तर: सुख
प्रश्न 5. यह सूक्ति किस भाषा में है?
उत्तर: संस्कृत
विद्या ददाति विनयम्
कक्षा 10 संस्कृत – 50 Objective Important Questions (MCQ)
बहुविकल्पीय प्रश्न
1. “विद्या ददाति विनयम्” का अर्थ है—
A. विद्या धन देती है
B. विद्या विनय देती है
C. विद्या सुख देती है
D. विद्या धर्म देती है
उत्तर: B
2. विनय से क्या प्राप्त होता है?
A. सुख
B. धर्म
C. पात्रता
D. धन
उत्तर: C
3. पात्रता से क्या मिलता है?
A. विनय
B. विद्या
C. धन
D. धर्म
उत्तर: C
4. धन से क्या प्राप्त होता है?
A. विनय
B. पात्रता
C. धर्म
D. सुख
उत्तर: C
5. धर्म से क्या प्राप्त होता है?
A. धन
B. विनय
C. सुख
D. विद्या
उत्तर: C
6. यह पाठ किस प्रकार का है?
A. कथा
B. नाटक
C. सूक्ति
D. निबंध
उत्तर: C
7. “विनय” शब्द का अर्थ क्या है?
A. क्रोध
B. नम्रता
C. भय
D. लोभ
उत्तर: B
8. विद्या का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
A. अहंकार
B. धन
C. चरित्र निर्माण
D. प्रसिद्धि
उत्तर: C
9. विद्या से पहले क्या आवश्यक है?
A. धन
B. पात्रता
C. गुरु
D. विनय
उत्तर: D
10. इस पाठ में कितने चरण बताए गए हैं?
A. चार
B. पाँच
C. छह
D. सात
उत्तर: C
11–20
11. विनयी व्यक्ति कैसा होता है?
A. घमंडी
B. योग्य
C. लोभी
D. क्रोधी
उत्तर: B
12. धन का सदुपयोग किसमें होना चाहिए?
A. विलास में
B. धर्म में
C. अहंकार में
D. संग्रह में
उत्तर: B
13. विद्या किस गुण को जन्म देती है?
A. अहंकार
B. लोभ
C. विनय
D. भय
उत्तर: C
14. सुख का स्थायी स्रोत क्या है?
A. धन
B. विद्या
C. धर्म
D. विनय
उत्तर: C
15. यह सूक्ति किस भाषा में है?
A. हिंदी
B. संस्कृत
C. प्राकृत
D. पालि
उत्तर: B
16. पात्र व्यक्ति की पहचान क्या है?
A. विनय
B. क्रोध
C. लोभ
D. आलस्य
उत्तर: A
17. विद्या का अंतिम फल क्या है?
A. धन
B. धर्म
C. सुख
D. विनय
उत्तर: C
18. विद्या किसे शोभा देती है?
A. अहंकारी को
B. विनयी को
C. धनी को
D. बलवान को
उत्तर: B
19. धर्म का उद्देश्य क्या है?
A. धन संग्रह
B. सुख प्राप्ति
C. प्रसिद्धि
D. शक्ति
उत्तर: B
20. इस पाठ में किसका विरोध किया गया है?
A. धर्म
B. विद्या
C. अहंकार
D. सुख
उत्तर: C
21–30
21. विनय से समाज में क्या मिलता है?
A. भय
B. सम्मान
C. संघर्ष
D. दुख
उत्तर: B
22. विद्या से मनुष्य कैसा बनता है?
A. घमंडी
B. हिंसक
C. विनम्र
D. स्वार्थी
उत्तर: C
23. धर्म का पालन किससे संभव है?
A. विद्या से
B. विनय से
C. धन से
D. पात्रता से
उत्तर: C
24. यह पाठ किस कक्षा के लिए है?
A. 8वीं
B. 9वीं
C. 10वीं
D. 12वीं
उत्तर: C
25. विद्या का संबंध किससे है?
A. केवल धन से
B. केवल नौकरी से
C. चरित्र से
D. केवल सुख से
उत्तर: C
26. विनय का विलोम क्या है?
A. नम्रता
B. अहंकार
C. धर्म
D. पात्रता
उत्तर: B
27. धर्म से पहले क्या आता है?
A. सुख
B. धन
C. विद्या
D. विनय
उत्तर: B
28. विद्या का प्रारंभ किससे होता है?
A. धन
B. सुख
C. विनय
D. अहंकार
उत्तर: C
29. सूक्ति का मुख्य संदेश क्या है?
A. धन सर्वोपरि है
B. सुख सर्वोपरि है
C. विद्या जीवन का आधार है
D. शक्ति महान है
उत्तर: C
30. विद्या से क्या दूर होता है?
A. सुख
B. धर्म
C. अहंकार
D. पात्रता
उत्तर: C
31–40
31. विनय किसका लक्षण है?
A. मूर्खता
B. विद्वत्ता
C. लोभ
D. भय
उत्तर: B
32. धन का सही उपयोग क्या है?
A. संग्रह
B. विलास
C. दान
D. अपव्यय
उत्तर: C
33. यह पाठ किस प्रकार का जीवन दिखाता है?
A. भोगवादी
B. नैतिक
C. युद्धप्रधान
D. भौतिक
उत्तर: B
34. पात्रता का अर्थ क्या है?
A. योग्यता
B. संपत्ति
C. शक्ति
D. प्रसिद्धि
उत्तर: A
35. विद्या से कौन-सा गुण नहीं आता?
A. विनय
B. पात्रता
C. अहंकार
D. धर्म
उत्तर: C
36. धर्म किसका साधन है?
A. धन का
B. सुख का
C. अहंकार का
D. लोभ का
उत्तर: B
37. विद्या का सही परिणाम क्या है?
A. शक्ति
B. प्रसिद्धि
C. विनम्रता
D. क्रोध
उत्तर: C
38. पाठ में जीवन को किस क्रम में बताया गया है?
A. धन → सुख → धर्म
B. विद्या → विनय → सुख
C. विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख
D. सुख → धन → विद्या
उत्तर: C
39. विनय से व्यक्ति कैसा बनता है?
A. लोभी
B. योग्य
C. आलसी
D. क्रोधी
उत्तर: B
40. सूक्ति का अंतिम शब्द क्या है?
A. धर्म
B. धन
C. सुख
D. विनय
उत्तर: C
41–50
41. विद्या का प्रथम फल क्या है?
A. धन
B. धर्म
C. विनय
D. सुख
उत्तर: C
42. यह पाठ किस मूल्य को बढ़ावा देता है?
A. अहंकार
B. नैतिकता
C. भोग
D. शक्ति
उत्तर: B
43. विद्या का विपरीत क्या है?
A. ज्ञान
B. अविद्या
C. विनय
D. पात्रता
उत्तर: B
44. धर्म का पालन कौन कर सकता है?
A. निर्धन
B. पात्र
C. धनी
D. विनयी
उत्तर: C
45. सुख का आधार क्या है?
A. धन
B. विद्या
C. धर्म
D. विनय
उत्तर: C
46. पाठ में किसे श्रेष्ठ बताया गया है?
A. धनी को
B. बलवान को
C. विद्वान को
D. विनयी विद्वान को
उत्तर: D
47. विद्या से व्यक्ति का कौन-सा दोष नष्ट होता है?
A. आलस्य
B. अहंकार
C. भय
D. लोभ
उत्तर: B
48. पात्रता किससे आती है?
A. धन से
B. सुख से
C. विनय से
D. धर्म से
उत्तर: C
49. इस सूक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. धन कमाना
B. चरित्र निर्माण
C. शक्ति प्रदर्शन
D. प्रसिद्धि
उत्तर: B
50. “विद्या ददाति विनयम्” हमें क्या सिखाती है?
A. भोग
B. अहंकार
C. नैतिक जीवन
D. संघर्ष
उत्तर: C
(समापन)

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