गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व 12th Class science - full story

 गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व 12th Class science - full story

गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व 12th Class science - full story

गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व (Moving Charges and Magnetism)

Full Story / सम्पूर्ण नोट्स सरल भाषा में दिए जा रहे हैं👇

अध्याय का परिचय

जब कोई विद्युत आवेश स्थिर होता है तो वह केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है, लेकिन जब वही आवेश गति करता है, तब उसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र भी उत्पन्न हो जाता है।

इसी सिद्धांत पर चुम्बकत्व और विद्युत धारा का गहरा संबंध आधारित है। इस अध्याय में हम चुम्बकीय क्षेत्र, लॉरेंज बल, बायोट–सावर्ट नियम, ऐम्पियर का नियम तथा धारा वाहक चालक पर लगने वाले बल का अध्ययन करते हैं।

1. गतिमान आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र

जब कोई आवेश qq वेग vv से चलता है, तो उसके चारों ओर

v से चलता है, तो उसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) उत्पन्न होता है।

👉 चुम्बकीय क्षेत्र को दर्शाने के लिए चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ प्रयोग की जाती हैं।

👉 ये रेखाएँ सदैव उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर होती हैं।

2. लॉरेंज बल (Lorentz Force)

जब कोई आवेश qq वेग vv

से चलता है, तो उसके चारों ओरq किसी विद्युत क्षेत्र (E) और चुम्बकीय क्षेत्र (B) में चलता है, तो उस पर लगने वाले कुल बल को लॉरेंज बल कहते हैं।

F=q(E+v×B)

✔ यदि केवल चुम्बकीय क्षेत्र हो, तो बल की दिशा वेग और क्षेत्र के लम्बवत होती है।

✔ चुम्बकीय बल आवेश के वेग की दिशा बदलता है, पर उसकी ऊर्जा नहीं बदलता।

3. चुम्बकीय क्षेत्र में आवेश की गति

यदि आवेश का वेग 

𝐵

B के लम्बवत हो → वृत्ताकार पथ

यदि वेग 

𝐵

B के तिरछा हो → हेलीकल (कुंडलीय) पथ

👉 इसी सिद्धांत का उपयोग साइक्लोट्रॉन में किया जाता है।

4. बायोट–सावर्ट नियम (Biot–Savart Law)

यह नियम बताता है कि किसी धारा वहन करने वाले चालक के छोटे भाग से उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा।

जहाँ,

  • II = धारा

  • dldl = चालक का छोटा भाग

  • rr = दूरी

  • θ\theta = कोण

5. ऐम्पियर का परिपथ नियम (Ampere’s Circuital Law)

किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ से गुजरने वाली कुल धारा के समानुपाती होता है।

Bdl=μ0II

✔ यह नियम लंबे सीधे चालक, सोलिनॉयड और टोरॉयड के लिए उपयोगी है।

6. धारा वाहक चालक पर चुम्बकीय बल

जब कोई धारा वहन करने वाला चालक चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर बल लगता है।

F=BILsinθ

👉 बल की दिशा जानने के लिए फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम प्रयोग किया जाता है।

7. फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम

  • अंगूठा → बल की दिशा
  • तर्जनी → चुम्बकीय क्षेत्र
  • मध्यमा → धारा की दिशा

✔ यह नियम विद्युत मोटर का आधार है।

8. दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल

  • समान दिशा की धाराएँ → आकर्षण
  • विपरीत दिशा की धाराएँ → प्रतिकर्षण

👉 इसी सिद्धांत के आधार पर एम्पियर को परिभाषित किया गया है।

9. चुम्बकीय द्विध्रुव

चुम्बकीय द्विध्रुव दो समान और विपरीत ध्रुवों से बना होता है।

इसका चुम्बकीय आघूर्ण होता है:

M=m×2l

अध्याय का सारांश

  • गतिमान आवेश चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है
  • लॉरेंज बल आवेश की दिशा बदलता है
  • बायोट–सावर्ट नियम से चुम्बकीय क्षेत्र की गणना
  • ऐम्पियर नियम सममित स्थितियों में उपयोगी
  • मोटर, गैल्वेनोमीटर आदि इसी अध्याय पर आधारित हैं

भूमिका
भौतिकी का यह अध्याय गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व कक्षा 12 के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इस अध्याय में हम यह अध्ययन करते हैं कि जब विद्युत आवेश गति करता है तो वह अपने चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा यह चुम्बकीय क्षेत्र अन्य गतिमान आवेशों और धारावाही चालकों पर बल लगाता है। यही सिद्धांत मोटर, जनरेटर, गैल्वेनोमीटर, ट्रांसफॉर्मर जैसे अनेक आधुनिक उपकरणों का आधार है।
1. गतिमान आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र
जब कोई विद्युत आवेश विरामावस्था में होता है तो वह केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है, लेकिन जब वही आवेश गति करने लगता है, तो उसके कारण चुम्बकीय क्षेत्र भी उत्पन्न होता है।
👉 निष्कर्ष:
  • स्थिर आवेश → केवल विद्युत क्षेत्र
  • गतिमान आवेश → विद्युत क्षेत्र + चुम्बकीय क्षेत्र
2. बायोट–सावर्ट नियम (Biot–Savart Law)
बायोट–सावर्ट नियम किसी धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना के लिए प्रयोग किया जाता है।
नियम के अनुसार:
  • चुम्बकीय क्षेत्र चालक में बहने वाली धारा के समानुपाती होता है।
  • चुम्बकीय क्षेत्र दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
यह नियम छोटे धारा तत्त्व द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र को व्यक्त करता है।
3. एम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere’s Circuital Law)
एम्पियर का नियम कहता है कि:
किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ को काटने वाली कुल धारा के समानुपाती होता है।
यह नियम लंबे सीधे चालक, सोलोनॉइड और टॉरॉइड के लिए चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने में उपयोगी है।
4. धारावाही चालक पर चुम्बकीय बल
जब कोई चालक किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है और उसमें धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक पर एक बल कार्य करता है।
👉 इस बल की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम प्रयोग किया जाता है।
यह सिद्धांत विद्युत मोटर का आधार है।
5. गतिमान आवेश पर चुम्बकीय बल (Lorentz Force)
जब कोई आवेश वेग v से किसी चुम्बकीय क्षेत्र B में प्रवेश करता है, तो उस पर चुम्बकीय बल लगता है।
  • यह बल आवेश के वेग और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है।
  • चुम्बकीय बल आवेश की चाल नहीं बदलता, केवल उसकी दिशा बदलता है।
6. वृत्तीय पथ में आवेश की गति
जब कोई आवेश चुम्बकीय क्षेत्र में लंबवत दिशा से प्रवेश करता है, तो वह वृत्तीय पथ में गति करता है।
👉 इसका उपयोग:
  • साइक्लोट्रॉन
  • मास स्पेक्ट्रोमीटर
  • कण त्वरक
7. सोलोनॉइड और टॉरॉइड
सोलोनॉइड एक लंबी कुंडली होती है, जिसमें धारा प्रवाहित करने पर उसके भीतर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
टॉरॉइड वृत्ताकार सोलोनॉइड होता है, जिसमें चुम्बकीय क्षेत्र बाहर लगभग शून्य होता है।
8. विद्युत धारा मापक यंत्र (Galvanometer)
गैल्वेनोमीटर एक संवेदनशील यंत्र है, जिससे बहुत कम धारा का पता लगाया जाता है।
👉 गैल्वेनोमीटर को:
  • एमीटर (धारा मापक)
  • वोल्टमीटर (विभवांतर मापक)
में परिवर्तित किया जा सकता है।
9. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
धारावाही कुंडली को एक चुम्बकीय द्विध्रुव माना जाता है। इसका द्विध्रुव आघूर्ण कुंडली के क्षेत्रफल और धारा पर निर्भर करता है।
10. अध्याय का महत्व
यह अध्याय न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी इसका व्यापक उपयोग है। आधुनिक तकनीक, चिकित्सा उपकरण, संचार साधन और औद्योगिक मशीनें इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
प्रश्न–उत्तर
(क) लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. गतिमान आवेश से क्या उत्पन्न होता है? उत्तर: गतिमान आवेश के कारण उसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
प्रश्न 2. बायोट–सावर्ट नियम क्या बताता है? उत्तर: यह नियम किसी धारा तत्त्व द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना बताता है।
प्रश्न 3. एम्पियर का परिपथीय नियम क्या है? उत्तर: किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ को काटने वाली कुल धारा के समानुपाती होता है।
प्रश्न 4. फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम किससे संबंधित है? उत्तर: यह धारावाही चालक पर लगने वाले चुम्बकीय बल की दिशा ज्ञात करता है।
प्रश्न 5. गैल्वेनोमीटर का उपयोग क्या है? उत्तर: बहुत कम विद्युत धारा का पता लगाने के लिए।
(ख) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. बायोट–सावर्ट नियम को लिखिए तथा उसका महत्व बताइए। उत्तर: बायोट–सावर्ट नियम के अनुसार किसी धारावाही चालक के छोटे धारा तत्त्व के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र धारा के समानुपाती तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस नियम का उपयोग सीधे चालक, वृत्ताकार कुंडली आदि के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने में किया जाता है।
प्रश्न 2. धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्या होता है? उत्तर: जब धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है। यह बल धारा और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है। यही सिद्धांत विद्युत मोटर का आधार है।
प्रश्न 3. सोलोनॉइड क्या है? इसके चुम्बकीय क्षेत्र की विशेषताएँ लिखिए। उत्तर: सोलोनॉइड एक लंबी बेलनाकार कुंडली होती है। इसमें धारा प्रवाहित करने पर इसके भीतर एकसमान एवं मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जबकि बाहर क्षेत्र बहुत कम होता है।
सारांश
इस अध्याय में हमने जाना कि जब विद्युत आवेश गति करता है, तो वह चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। बायोट–सावर्ट नियम और एम्पियर का नियम चुम्बकीय क्षेत्र की गणना में सहायक हैं। धारावाही चालक और गतिमान आवेश पर लगने वाला चुम्बकीय बल कई विद्युत उपकरणों का आधार है। सोलोनॉइड, टॉरॉइड और गैल्वेनोमीटर जैसे यंत्रों का अध्ययन इस अध्याय को व्यावहारिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय सूत्रों, नियमों और उनके अनुप्रयोग के कारण बहुत उपयोगी है।
निष्कर्ष
गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व अध्याय विद्युत और चुम्बकत्व के आपसी संबंध को स्पष्ट करता है। यह अध्याय आगे के विद्युतचुंबकीय अध्यायों की नींव रखता है और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में इसके अनुप्रयोग अत्यंत व्यापक हैं।
गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व (Moving Charges and Magnetism)
भूमिका
भौतिकी का यह अध्याय गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व कक्षा 12 के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इस अध्याय में हम यह अध्ययन करते हैं कि जब विद्युत आवेश गति करता है तो वह अपने चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा यह चुम्बकीय क्षेत्र अन्य गतिमान आवेशों और धारावाही चालकों पर बल लगाता है। यही सिद्धांत मोटर, जनरेटर, गैल्वेनोमीटर, ट्रांसफॉर्मर जैसे अनेक आधुनिक उपकरणों का आधार है।
1. गतिमान आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र
जब कोई विद्युत आवेश विरामावस्था में होता है तो वह केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है, लेकिन जब वही आवेश गति करने लगता है, तो उसके कारण चुम्बकीय क्षेत्र भी उत्पन्न होता है।
👉 निष्कर्ष:
स्थिर आवेश → केवल विद्युत क्षेत्र
गतिमान आवेश → विद्युत क्षेत्र + चुम्बकीय क्षेत्र
2. बायोट–सावर्ट नियम (Biot–Savart Law)
बायोट–सावर्ट नियम किसी धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना के लिए प्रयोग किया जाता है।
नियम के अनुसार:
चुम्बकीय क्षेत्र चालक में बहने वाली धारा के समानुपाती होता है।
चुम्बकीय क्षेत्र दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
यह नियम छोटे धारा तत्त्व द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र को व्यक्त करता है।
3. एम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere’s Circuital Law)
एम्पियर का नियम कहता है कि:
किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ को काटने वाली कुल धारा के समानुपाती होता है।
यह नियम लंबे सीधे चालक, सोलोनॉइड और टॉरॉइड के लिए चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने में उपयोगी है।
4. धारावाही चालक पर चुम्बकीय बल
जब कोई चालक किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है और उसमें धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक पर एक बल कार्य करता है।
👉 इस बल की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम प्रयोग किया जाता है।
यह सिद्धांत विद्युत मोटर का आधार है।
5. गतिमान आवेश पर चुम्बकीय बल (Lorentz Force)
जब कोई आवेश वेग v से किसी चुम्बकीय क्षेत्र B में प्रवेश करता है, तो उस पर चुम्बकीय बल लगता है।
यह बल आवेश के वेग और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है।
चुम्बकीय बल आवेश की चाल नहीं बदलता, केवल उसकी दिशा बदलता है।
6. वृत्तीय पथ में आवेश की गति
जब कोई आवेश चुम्बकीय क्षेत्र में लंबवत दिशा से प्रवेश करता है, तो वह वृत्तीय पथ में गति करता है।
👉 इसका उपयोग:
साइक्लोट्रॉन
मास स्पेक्ट्रोमीटर
कण त्वरक
7. सोलोनॉइड और टॉरॉइड
सोलोनॉइड एक लंबी कुंडली होती है, जिसमें धारा प्रवाहित करने पर उसके भीतर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
टॉरॉइड वृत्ताकार सोलोनॉइड होता है, जिसमें चुम्बकीय क्षेत्र बाहर लगभग शून्य होता है।
8. विद्युत धारा मापक यंत्र (Galvanometer)
गैल्वेनोमीटर एक संवेदनशील यंत्र है, जिससे बहुत कम धारा का पता लगाया जाता है।
👉 गैल्वेनोमीटर को:
एमीटर (धारा मापक)
वोल्टमीटर (विभवांतर मापक)
में परिवर्तित किया जा सकता है।
9. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
धारावाही कुंडली को एक चुम्बकीय द्विध्रुव माना जाता है। इसका द्विध्रुव आघूर्ण कुंडली के क्षेत्रफल और धारा पर निर्भर करता है।
10. अध्याय का महत्व
यह अध्याय न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी इसका व्यापक उपयोग है। आधुनिक तकनीक, चिकित्सा उपकरण, संचार साधन और औद्योगिक मशीनें इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
प्रश्न–उत्तर
(क) लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. गतिमान आवेश से क्या उत्पन्न होता है? उत्तर: गतिमान आवेश के कारण उसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
प्रश्न 2. बायोट–सावर्ट नियम क्या बताता है? उत्तर: यह नियम किसी धारा तत्त्व द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना बताता है।
प्रश्न 3. एम्पियर का परिपथीय नियम क्या है? उत्तर: किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ को काटने वाली कुल धारा के समानुपाती होता है।
प्रश्न 4. फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम किससे संबंधित है? उत्तर: यह धारावाही चालक पर लगने वाले चुम्बकीय बल की दिशा ज्ञात करता है।
प्रश्न 5. गैल्वेनोमीटर का उपयोग क्या है? उत्तर: बहुत कम विद्युत धारा का पता लगाने के लिए।
(ख) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. बायोट–सावर्ट नियम को लिखिए तथा उसका महत्व बताइए। उत्तर: बायोट–सावर्ट नियम के अनुसार किसी धारावाही चालक के छोटे धारा तत्त्व के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र धारा के समानुपाती तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस नियम का उपयोग सीधे चालक, वृत्ताकार कुंडली आदि के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने में किया जाता है।
प्रश्न 2. धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्या होता है? उत्तर: जब धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है। यह बल धारा और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है। यही सिद्धांत विद्युत मोटर का आधार है।
प्रश्न 3. सोलोनॉइड क्या है? इसके चुम्बकीय क्षेत्र की विशेषताएँ लिखिए। उत्तर: सोलोनॉइड एक लंबी बेलनाकार कुंडली होती है। इसमें धारा प्रवाहित करने पर इसके भीतर एकसमान एवं मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जबकि बाहर क्षेत्र बहुत कम होता है।
सारांश
इस अध्याय में हमने जाना कि जब विद्युत आवेश गति करता है, तो वह चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। बायोट–सावर्ट नियम और एम्पियर का नियम चुम्बकीय क्षेत्र की गणना में सहायक हैं। धारावाही चालक और गतिमान आवेश पर लगने वाला चुम्बकीय बल कई विद्युत उपकरणों का आधार है। सोलोनॉइड, टॉरॉइड और गैल्वेनोमीटर जैसे यंत्रों का अध्ययन इस अध्याय को व्यावहारिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय सूत्रों, नियमों और उनके अनुप्रयोग के कारण बहुत उपयोगी है।
MCQ (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
प्रश्न 1. गतिमान आवेश के कारण कौन-सा क्षेत्र उत्पन्न होता है? (a) केवल विद्युत क्षेत्र
(b) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(c) विद्युत एवं चुम्बकीय दोनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: (c)
प्रश्न 2. बायोट–सावर्ट नियम किससे संबंधित है? (a) विद्युत बल
(b) चुम्बकीय क्षेत्र
(c) विद्युत विभव
(d) धारिता
उत्तर: (b)
प्रश्न 3. एम्पियर का नियम किसके लिए उपयोगी है? (a) आवेश ज्ञात करने में
(b) धारा मापने में
(c) चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करने में
(d) विभव ज्ञात करने में
उत्तर: (c)
प्रश्न 4. फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम किस यंत्र का आधार है? (a) जनरेटर
(b) मोटर
(c) ट्रांसफॉर्मर
(d) बैटरी
उत्तर: (b)
प्रश्न 5. सोलोनॉइड के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र कैसा होता है? (a) असमान
(b) शून्य
(c) एकसमान
(d) परिवर्तनीय
उत्तर: (c)
एक शब्द / परिभाषा वाले प्रश्न
1. गतिमान आवेश से उत्पन्न क्षेत्र को क्या कहते हैं?
उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र
2. बहुत कम धारा मापने वाला यंत्र क्या कहलाता है?
उत्तर: गैल्वेनोमीटर
3. धारा की SI इकाई क्या है?
उत्तर: एम्पियर
4. चुम्बकीय क्षेत्र की SI इकाई क्या है?
उत्तर: टेस्ला
5. धारावाही कुंडली क किस रूप में माना जाता है?
उत्तर: चुम्बकीय द्विध्रुव
अतिरिक्त प्रश्न–उत्तर
प्रश्न 1. लोरेंत्ज बल क्या है? उत्तर: जब कोई आवेश किसी चुम्बकीय क्षेत्र में वेग से गति करता है, तो उस पर लगने वाले बल को लोरेंत्ज बल कहते हैं।
प्रश्न 2. टॉरॉइड क्या है? उत्तर: टॉरॉइड एक वृत्ताकार सोलोनॉइड होता है, जिसमें बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र लगभग शून्य होता है।
निष्कर्ष
गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व अध्याय विद्युत और चुम्बकत्व के आपसी संबंध को स्पष्ट करता है। यह अध्याय आगे के विद्युतचुंबकीय अध्यायों की नींव रखता है और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में इसके अनुप्रयोग अत्यंत व्यापक हैं।
 गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व
50 Objective Important Questions & Answers
1. चुम्बकीय क्षेत्र की SI इकाई क्या है?
उत्तर: टेस्ला (T)
2. गतिमान आवेश पर लगने वाले बल को क्या कहते हैं?
उत्तर: लॉरेंज बल
3. चुम्बकीय क्षेत्र में आवेश पर लगने वाले बल की दिशा किस नियम से ज्ञात होती है?
उत्तर: फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम Drextion
4. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कैसी होती हैं?
उत्तर: बंद वक्र (Closed loops)
5. चुम्बकीय क्षेत्र में स्थिर आवेश पर बल कितना होगा?
उत्तर: शून्य
6. धारा वहन करने वाले चालक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र किसने खोजा?
उत्तर: ऑर्स्टेड
7. बायोट-सावर्ट नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: धारा से उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
8. बायोट-सावर्ट नियम में चुम्बकीय क्षेत्र किस पर निर्भर करता है?
उत्तर: धारा, दूरी व कोण पर
9. ऐम्पियर परिपथीय नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र व धारा
10. ऐम्पियर का नियम किस प्रकार की धाराओं के लिए उपयुक्त है?
उत्तर: सममित (Symmetrical) धाराएँ
11. सोलोनॉइड के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र कैसा होता है?
उत्तर: समान (Uniform)
12. सोलोनॉइड के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र किसके समान होता है?
उत्तर: दंड चुम्बक
13. मूविंग चार्ज से उत्पन्न क्षेत्र कौन-सा है?
उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र
14. चुम्बकीय बल किसके लंबवत होता है?
उत्तर: वेग और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के
15. वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र किस दिशा में होता है?
उत्तर: कुंडली के तल के लंबवत
16. फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: विद्युत जनित्र
17. फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: विद्युत मोटर
18. एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में आवेश की चाल कैसी होती है?
उत्तर: वृत्ताकार
19. चुम्बकीय क्षेत्र में आवेश की त्रिज्या किस पर निर्भर करती है?
उत्तर: वेग और क्षेत्र पर
20. साइक्लोट्रॉन किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र में आवेश की गति
21. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की SI इकाई क्या है?
उत्तर: एम्पियर-मीटर²
22. पृथ्वी किस प्रकार का चुम्बक है?
उत्तर: दंड चुम्बक
23. पृथ्वी के चुम्बकीय अक्ष और घूर्णन अक्ष के बीच कोण कितना है?
उत्तर: लगभग 11.5°
24. चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता किसे कहते हैं?
उत्तर: इकाई धारा पर क्षेत्र
25. विद्युत धारा की दिशा किसके विपरीत होती है?
उत्तर: इलेक्ट्रॉनों की गति
26. चुंबकीय क्षेत्र में चालक पर बल किस पर निर्भर नहीं करता?
उत्तर: चालक के पदार्थ पर
27. समानांतर धाराएँ एक-दूसरे को क्या करती हैं?
उत्तर: आकर्षित
28. विपरीत दिशाओं में धाराएँ क्या करती हैं?
उत्तर: प्रतिकर्षित
29. धारा की SI इकाई क्या है?
उत्तर: एम्पियर
30. टॉर्क किस पर लगता है?
उत्तर: धारा वहन करने वाली कुंडली पर
31. गैल्वेनोमीटर का उपयोग किसके लिए होता है?
उत्तर: सूक्ष्म धारा मापन
32. गैल्वेनोमीटर को एमीटर में बदलने के लिए क्या जोड़ा जाता है?
उत्तर: शंट प्रतिरोध
33. गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए क्या जोड़ा जाता है?
उत्तर: उच्च प्रतिरोध
34. चुम्बकीय क्षेत्र में चालक पर अधिकतम बल कब लगता है?
उत्तर: जब θ = 90°
35. लॉरेंज बल में विद्युत बल किस पर निर्भर करता है?
उत्तर: विद्युत क्षेत्र पर
36. चुम्बकीय बल किस पर निर्भर करता है?
उत्तर: वेग और चुम्बकीय क्षेत्र पर
37. चुम्बकीय क्षेत्र में कण की ऊर्जा क्या होती है?
उत्तर: अपरिवर्तित
38. पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक क्या कहलाता है?
उत्तर: H
39. पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का लंबवत घटक क्या कहलाता है?
उत्तर: V
40. चुंबकीय रेखाएँ कहाँ अधिक सघन होती हैं?
उत्तर: ध्रुवों के पास
41. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को क्यों नहीं काटतीं?
उत्तर: दिशा अद्वितीय होने के कारण
42. चुंबकीय पारगम्यता किसका गुण है?
उत्तर: माध्यम का
43. निर्वात की चुंबकीय पारगम्यता का मान क्या है?
उत्तर: μ₀
44. दायाँ हाथ अंगूठा नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: धारा की दिशा और क्षेत्र
45. चुम्बकीय क्षेत्र का स्रोत क्या है?
उत्तर: गतिमान आवेश
46. धारा के कारण उत्पन्न क्षेत्र किस प्रकार का है?
उत्तर: वृत्ताकार
47. चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण किससे मापा जाता है?
उत्तर: टेस्ला से
48. समान चुम्बकीय क्षेत्र में कुंडली पर कुल बल कितना होता है?
उत्तर: शून्य
49. चुम्बकीय क्षेत्र में कुंडली पर क्या उत्पन्न होता है?
उत्तर: घूर्णन आघूर्ण
50. विद्युत मोटर किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: धारा वहन करने वाले चालक पर बल
उपसंहार (Outro)
इस अध्याय “गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व” में हमने यह समझा कि जब विद्युत आवेश गति करता है तो वह अपने चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और यही क्षेत्र अनेक महत्वपूर्ण भौतिक घटनाओं का कारण बनता है। ऑर्स्टेड का प्रयोग, बायोट–सावर्ट नियम, ऐम्पियर परिपथीय नियम तथा लॉरेंज बल जैसे सिद्धांत हमें यह स्पष्ट करते हैं कि विद्युत धारा और चुम्बकत्व एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
इस अध्याय के माध्यम से धारा वहन करने वाले चालक पर लगने वाले बल, कुंडली पर उत्पन्न घूर्णन आघूर्ण, सोलोनॉइड और वृत्ताकार कुंडली के चुम्बकीय क्षेत्र तथा फ्लेमिंग के दाएँ और बाएँ हाथ के नियमों की व्यावहारिक उपयोगिता को समझाया गया है। इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर विद्युत मोटर, जनित्र, गैल्वेनोमीटर, साइक्लोट्रॉन जैसे महत्वपूर्ण उपकरण कार्य करते हैं, जो हमारे दैनिक जीवन और आधुनिक तकनीक का अभिन्न हिस्सा हैं।
परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सूत्रों, परिभाषाओं, नियमों और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की भरपूर संभावना रहती है। यदि विद्यार्थी इस अध्याय के नियमों को तर्क सहित समझकर नियमित अभ्यास करें, तो वे न केवल बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं बल्कि भौतिकी के आगे के अध्यायों को भी आसानी से समझ पाएँगे। अतः “गतिमान आवेश तथा चुम्बकत्व” अध्याय भौतिकी की नींव को मजबूत करने वाला एक अत्यंत उपयोगी और रोचक अध्याय है।

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